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GharKaNaksha
Vastu Shastra 25 Sep, 2026 5 min read

घर बनाते समय वास्तु में क्या-क्या देखें? Practical Vastu Guide for House Planning.

By Civil Engineer & Vastu Expert

घर बनाते समय वास्तु में क्या-क्या देखें? Practical Vastu Guide for House Planning.

जब भी कोई व्यक्ति अपना घर बनवाने की सोचता है, तो उसके मन में एक सवाल जरूर आता है—घर का नक्शा वास्तु के अनुसार कैसे बनवाएं और वास्तु में आखिर कितना ध्यान देना जरूरी है?

मेरे पास जब भी कोई घर का नक्शा बनवाने आता है, तो बहुत से लोग शुरुआत में ही कहते हैं कि “घर पूरी तरह वास्तु के अनुसार होना चाहिए।” लेकिन जब हम वास्तविक plot पर planning शुरू करते हैं, तो हमें plot की लंबाई-चौड़ाई, road की position, parking, ventilation, सीढ़ी, bedrooms, toilet और परिवार की जरूरतें भी साथ लेकर चलनी पड़ती हैं।

यहीं पर मेरा मानना है कि वास्तु को समझना जरूरी है, लेकिन उसे practical planning के साथ लेकर चलना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

आज ज्यादातर लोगों के पास बहुत बड़ी जमीन नहीं होती। किसी के पास 20×40 ft का plot है, किसी के पास 30×50 ft और किसी के पास 40×50 ft। ऐसे में हर वास्तु नियम को 100% लागू करने की कोशिश में कई बार घर की वास्तविक usability खराब हो सकती है।

इस article में मैं वही बातें बता रहा हूँ जिन्हें मैं खुद किसी घर का नक्शा बनाते समय प्राथमिकता देता हूँ।


1. सबसे पहले Plot की Direction और Facing समझें

घर का नक्शा शुरू करने से पहले मैं सबसे पहले यह देखता हूँ कि plot की facing क्या है—East Facing, West Facing, North Facing या South Facing।

इसके लिए केवल यह मान लेना सही नहीं है कि सामने road है इसलिए यही exact East या West है। Site पर compass से direction check करना बेहतर रहता है।

कई plots बिल्कुल exact 90° East, West, North या South में aligned नहीं होते, बल्कि कुछ degree घूमे हुए होते हैं। ऐसे plot में वास्तविक orientation को देखकर practical planning करनी चाहिए।

यही direction आगे kitchen, pooja room, master bedroom, staircase, parking और दूसरे spaces की planning का base बनती है।


. Parking कहाँ रखें?

Parking ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ गाड़ी आसानी से अंदर-बाहर हो सके और main entrance या घर की movement बाधित न हो।

मेरी planning में East और North facing plots में, यदि road और plot dimensions allow करते हैं, तो मैं अक्सर North या North-East side की openness/parking possibility देखता हूँ। West-facing plot में North-West side practical हो तो parking के लिए consider करता हूँ।

लेकिन यहाँ सिर्फ वास्तु देखकर parking तय नहीं करनी चाहिए।

मान लीजिए वास्तु के अनुसार आपको एक तरफ parking चाहिए, लेकिन वहाँ से गाड़ी मोड़ ही नहीं सकती या road इतनी संकरी है कि car entry मुश्किल हो जाएगी, तो ऐसी planning practical नहीं है।

इसलिए road width, gate position, turning radius और plot frontage भी साथ देखना जरूरी है।


3. Kitchen के लिए South-East को प्राथमिकता

घर के वास्तु में जिन चीजों को मैं ज्यादा प्राथमिकता देता हूँ, उनमें kitchen बहुत महत्वपूर्ण है।

परंपरागत वास्तु में South-East को Agni Kon माना जाता है और kitchen के लिए इसी दिशा को प्रमुख स्थान दिया जाता है। कई Vastu references में South-East उपलब्ध न होने पर North-West को alternative के रूप में भी बताया गया है।

इसलिए नक्शा बनाते समय मेरी पहली कोशिश रहती है कि kitchen को South-East zone में अच्छी तरह adjust किया जाए।

लेकिन kitchen को सिर्फ सही direction में रख देना पर्याप्त नहीं है। उसमें ventilation भी होना चाहिए। Window, exhaust और जरूरत के अनुसार OTS देकर smoke और गर्म हवा बाहर निकलने की व्यवस्था होनी चाहिए।

एक अच्छी kitchen वह है जो वास्तु के साथ इस्तेमाल करने में भी comfortable हो।


4. Pooja Room के लिए North-East

Pooja room के लिए मैं North-East यानी ईशान कोण को प्राथमिकता देता हूँ। Traditional Vastu guidance में भी North-East को pooja/prayer space के लिए प्रमुख दिशा माना गया है।

छोटे plot में अलग से बड़ा पूजा घर बनाना हमेशा संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में North-East के आसपास living या किसी clean space में छोटा dedicated pooja area बनाया जा सकता है।

मेरा उद्देश्य यह नहीं रहता कि pooja room के कारण बाकी पूरा floor plan बिगाड़ दिया जाए, बल्कि उपलब्ध जगह में उसकी location को जितना संभव हो उतना बेहतर रखा जाए।


5. Borewell या Underground Water Point

अगर plot में borewell या underground water source देना हो, तो वास्तु को प्राथमिकता देने वाले clients के लिए मैं North-East side को पहले consider करता हूँ।

Traditional Vastu references में North-East को underground water source से भी जोड़ा जाता है।

लेकिन यहाँ एक practical बात बहुत महत्वपूर्ण है—पानी के source की location केवल वास्तु से तय नहीं की जानी चाहिए। Site की groundwater condition, local regulations, septic tank/soak pit से सुरक्षित दूरी और technical feasibility भी देखनी चाहिए।


6. घर के मुखिया का Bedroom – South-West

घर का मुख्य bedroom या master bedroom रखते समय मेरी कोशिश रहती है कि South-West zone में bedroom मिल जाए।

वास्तु में भी South-West को master bedroom या घर के senior/head member के bedroom के लिए commonly recommended माना जाता है।

इसलिए South-West को पूरा staircase से भर देने से पहले मैं यह जरूर देखता हूँ कि वहाँ bedroom की अच्छी possibility बन रही है या नहीं।

यही कारण है कि “staircase South-West में होनी चाहिए” का मतलब मेरे लिए यह नहीं है कि South-West का exact corner हर हाल में staircase को ही दे दिया जाए।

Planning पूरे घर को देखकर होती है, किसी एक नियम को अलग से पकड़कर नहीं।


7. Staircase कहाँ रखें?

Staircase के लिए मेरी कोशिश रहती है कि उसे South, West या South-West side में अच्छी तरह adjust किया जाए। Traditional Vastu guidance में भी staircase के लिए South/West/South-West zones commonly बताए जाते हैं।

लेकिन staircase की सबसे बड़ी requirement है कि वह comfortable हो।

सिर्फ वास्तु के लिए ऐसी staircase नहीं बनानी चाहिए जिस पर बुजुर्ग, बच्चे या सामान्य व्यक्ति आसानी से चढ़ ही न पाए।

Rise, tread, headroom, landing और staircase width जैसी technical चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं और इन्हें applicable building rules और structural requirements के अनुसार रखना चाहिए।

जहाँ client की preference होती है, वहाँ मैं stair steps की संख्या odd जैसे 15, 17, 19, 21 आदि रखने की कोशिश करता हूँ; odd-number preference कुछ contemporary Vastu guides में भी मिलती है। लेकिन इसे structural या safety requirement से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।


8. गाँव के घर में External Staircase की Planning

Village house planning में एक common requirement होती है कि staircase घर के अंदर न होकर बाहर से first floor तक जाए।

इसका फायदा यह है कि भविष्य में ऊपर का floor अलग इस्तेमाल करना हो, किराए पर देना हो या परिवार के दूसरे सदस्य को देना हो, तो नीचे के private area से होकर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

ऐसी condition में मैं South या West side में external staircase की possibility पहले देखता हूँ। अगर वहाँ सीधे staircase possible नहीं है, तो proper passage देकर staircase तक independent access बनाने की कोशिश करता हूँ।

लेकिन passage इतना होना चाहिए कि ground floor की parking और daily movement खराब न हो।


9. Toilet की Planning में Practical Approach जरूरी है

यहाँ मैं एक बात साफ रखना चाहता हूँ—toilet के लिए अलग-अलग Vastu traditions और modern guides में अलग recommendations मिलती हैं। कई contemporary Vastu guides West या North-West को toilet के लिए suitable बताते हैं और North-East तथा centre को avoid करने की सलाह देते हैं।

इसलिए “toilet को किसी भी corner में नहीं रखना चाहिए” को universal Vastu rule मानना सही नहीं होगा।

मेरी practical planning में ज्यादा महत्वपूर्ण यह होता है कि toilet:

  • kitchen के साथ गलत तरीके से conflict न करे,
  • अच्छी ventilation पाए,
  • plumbing line practical रहे,
  • bedroom/living की privacy खराब न करे,
  • और जहाँ संभव हो North-East तथा घर के बिल्कुल central zone से बचाया जाए।

यानी toilet की position में Vastu + ventilation + plumbing + privacy, चारों चीजें देखना बेहतर है।


10. OTS और Ventilation को वास्तु के चक्कर में मत भूलिए

कई बार लोग kitchen और bedroom की दिशा पर इतना ध्यान देते हैं कि ventilation भूल जाते हैं।

मेरे लिए अच्छे house plan में OTS यानी Open to Sky space बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब plot तीन तरफ दूसरे मकानों से घिरा हो।

अगर bedroom, kitchen या toilet में direct बाहरी ventilation नहीं मिल रहा है, तो OTS देकर natural light और हवा की व्यवस्था की जा सकती है।

याद रखिए—सिर्फ सही दिशा में बना कमरा, जिसमें न पर्याप्त हवा आए और न natural light, practical रूप से अच्छा room नहीं कहलाएगा।


11. North और East Side में Openness

जहाँ plot और requirement allow करते हैं, वहाँ मैं North और East side में comparatively अच्छी openness रखने की कोशिश करता हूँ।

North-East को बहुत heavy या congested करने के बजाय थोड़ा खुला रखने से planning में pooja, entrance, light या open space जैसी possibilities भी मिलती हैं। Traditional Vastu guidance भी North-East को light/open रखने पर जोर देती है।

लेकिन छोटे plot में चारों तरफ बड़ा setback छोड़ना संभव नहीं होता। ऐसे में सबसे पहले local building rules के required setbacks देखें और उसके बाद उपलब्ध space को intelligently plan करें।


12. Duplex या दो अलग Floors में कितना Vastu देखें?

यह एक बहुत practical सवाल है।

कई बार ground floor client अपने रहने के लिए बनवाता है और first floor भविष्य, बच्चों या rental purpose के लिए होता है।

मेरी approach में पहले उस floor को priority दी जाती है जो primary residence है। उसमें kitchen, pooja, master bedroom, staircase, ventilation आदि को यथासंभव बेहतर रखा जाता है।

ऊपर के floor में भी अच्छी planning होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ हर Vastu position को दोहराने के लिए नीचे की structural alignment, column position, plumbing या usable space खराब करना उचित नहीं है।


13. क्या 100% Vastu वाला घर बनाना जरूरी है?

मेरे हिसाब से यही इस पूरे article की सबसे महत्वपूर्ण बात है।

अगर आपके पास बहुत बड़ा plot है और requirements कम हैं, तो आप बहुत सारे Vastu principles आसानी से follow कर सकते हैं।

लेकिन अगर आपके पास 20×40, 25×50, 30×40 या इसी तरह का सामान्य residential plot है और आपको उसी में parking, bedrooms, kitchen, staircase, toilet, living और ventilation सब चाहिए, तो कहीं न कहीं adjustment आएगा।

ऐसी situation में मेरी priority रहती है:

Kitchen → Pooja Space → Master Bedroom → Water Point → Staircase → Parking/Open Space → Ventilation/OTS

यह कोई शास्त्रीय “priority ranking” नहीं है, बल्कि मेरी practical house-planning approach है।

सबसे बड़ी गलती यह होगी कि वास्तु के नाम पर आप ऐसा घर बना लें जो रोजमर्रा में uncomfortable हो।


वास्तु और Practical House Planning को साथ लेकर चलें

मेरी नजर में अच्छा घर वह नहीं है जिसमें compass लगाकर हर चीज बिल्कुल perfect दिखाई दे, लेकिन रहने वाले परेशान हों।

अच्छा घर वह है जिसमें परिवार की जरूरत, plot size, ventilation, natural light, privacy, parking, structural safety और applicable building rules पहले से समझे गए हों और जहाँ संभव हो वहाँ वास्तु के महत्वपूर्ण principles भी अच्छी तरह incorporate किए गए हों।

इसलिए अगर आप अपना घर बनवा रहे हैं, तो शुरुआत में ही designer/engineer को बता दें कि आप वास्तु को कितना महत्व देना चाहते हैं।

इससे नक्शा बनने के बाद kitchen, staircase या bedroom को बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


निष्कर्ष

घर बनाना ज्यादातर परिवारों के लिए जिंदगी के सबसे बड़े investments में से एक होता है। इसलिए सिर्फ एक Vastu rule के पीछे पूरा design खराब करना भी सही नहीं है और बिना planning के महत्वपूर्ण चीजों को ignore करना भी सही नहीं है।

अगर आप वास्तु मानते हैं, तो शुरुआत से ही plot direction, South-East kitchen, North-East pooja space, South-West master bedroom, suitable staircase location, water point, parking और ventilation/OTS जैसी मुख्य चीजों को plan में शामिल करने की कोशिश करें।

जहाँ plot allow करे वहाँ follow करें और जहाँ संभव न हो, वहाँ घर की safety, structural design, ventilation, sanitation और usability से compromise न करें।

यही approach मैं house planning में ज्यादा practical मानता हूँ।

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी और मेरे practical house-planning experience के आधार पर तैयार किया गया है। वास्तु शास्त्र की अलग-अलग परंपराओं और विशेषज्ञों में कुछ नियमों की व्याख्या अलग हो सकती है। किसी विशेष plot या घर के लिए अंतिम निर्णय लेते समय योग्य वास्तु विशेषज्ञ, architect/engineer और लागू स्थानीय building rules की सलाह लेना उचित है।

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